रविवार, 24 दिसंबर 2017

टॉफ़ी नहीं कॉपी दो

टॉफ़ी देकर खुश करते हो
मुझको कॉपी लाकर दो
बहुत हुये अब उतरे कपड़े
मुझको वर्दी लाकर दो

हाथ गाड़ियाँ  बहुत चलाई
बालू महल बनाये खूब
ढक्कन डिबिया जोड़ लिये हैं
स्लेट और बत्ती लाकर दो

नहीं जानते कैसे दाखिल
करना है विद्यालय में
माई बाबू ईंट ढो रहे
मुझको बस्ता लाकर दो

मैं खुद जाकर टीचर जी से
कह दूंगी दाखिल कर लो
मेरे सारे ढक्कन लेकर
मुझको भी साक्षर कर दो
                         प्रीति राघव चौहान

सोमवार, 13 नवंबर 2017

सुरखाब

       सुरखाब
शहर के आला अफसरान
के पास थी
एक लिस्ट शहर के
हरफनमौलाओं की
धुरंधर विद्वानों की
 ध्रुव से तारों की
      बांटे गए
आनन-फानन में पुरस्कार
काले तीतर नवाजे गए
सम्माननीय पदकों से
चील /कौवे /बया /गिद्ध /तोते
सारस और मोर
सभी अपने कार्य को
बखूबी निभाते हुए
ढूंढ रहे थे वह सींग
 जो तीतरों के सिर पर
देखें अफसरान ने
सुरखाब के परों का तो
 जिक्र भी नदारद था!!!!!
   प्रीति राघव चौहान